
इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट कर दिया है कि इसराइल ग़ज़ा में चल रहे युद्ध को तभी समाप्त करेगा जब उसकी प्रमुख सुरक्षा शर्तें पूरी होंगी। उन्होंने कहा कि ग़ज़ा में शांति तभी मुमकिन है जब:
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सभी इसराइली बंधकों को रिहा किया जाए
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हमास पूरी तरह से आत्मसमर्पण करे
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ग़ज़ा से हमास के नेतृत्व को समाप्त किया जाए
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पूरा इलाका हथियार मुक्त (Demilitarized) हो
नेतन्याहू ने एक कड़ा संदेश देते हुए कहा:
“जो लोग युद्ध बंद करने की मांग कर रहे हैं, वे दरअसल हमास के शासन को बनाए रखना चाहते हैं।”
ग़ज़ा छोड़ने वालों को मिलेगा रास्ता
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि जो लोग ग़ज़ा से जाना चाहते हैं, वे ऐसा कर सकते हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि यह विकल्प किन लोगों के लिए खुला होगा – नागरिकों के लिए या हमास के लड़ाकों के लिए।
संघर्ष की भयावह तस्वीर: 53,000 से अधिक मौतें
हमास-नियंत्रित ग़ज़ा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इसराइल और ग़ज़ा संघर्ष की शुरुआत के बाद से अब तक 53,000 से अधिक लोग मारे गए हैं। यह आंकड़ा ग़ज़ा में मानवीय त्रासदी की भयावहता को दर्शाता है।
क्यों टकराव अब भी जारी है?
इसराइल के लिए हमास केवल एक आतंकी संगठन नहीं, बल्कि एक स्थायी सुरक्षा खतरा बन चुका है। नेतन्याहू ने बार-बार स्पष्ट किया है कि जब तक हमास की सैन्य और राजनीतिक ताकत को पूरी तरह खत्म नहीं किया जाता, इसराइल पीछे नहीं हटेगा।
क्या है रास्ता शांति का?
विश्लेषकों के मुताबिक, ग़ज़ा में स्थायी शांति के लिए जरूरी है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय एक स्वतंत्र निरीक्षण तंत्र, पुनर्निर्माण प्रयास, और स्थानीय शासन व्यवस्था की नई रूपरेखा पर ध्यान दे। लेकिन जब तक नेतन्याहू की घोषित शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक युद्धविराम की कोई ठोस संभावना नहीं दिखती।
ग़ज़ा पर निर्णायक कार्रवाई चाहता है इसराइल
बिन्यामिन नेतन्याहू की हालिया टिप्पणी इस बात का संकेत है कि इसराइल अब अधूरी कार्रवाई नहीं, बल्कि पूर्ण नियंत्रण और सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहता है। शांति की राह शर्तों से होकर ही निकलेगी – और यह रास्ता बेहद कठिन और खून-भरा हो सकता है।

